ये उन दिनों की बात है

ये उन दिनों की बात है :

कहानी कुछ यु थी,,, 
ये तब की बाते  है, जब मैं teenager थी.,,,,, 
बड़ी चंचल मन की थी, 
बगैर कुछ भी सोचे किसी से भी बेहिचक कह देती थी, कभी किसी को पसंद अति कभी नहीँ, लेकिन किसी बात से फर्क नहीँ पडती जैसे मैंने तो कसम कहा रखी ho,,,, हम तो भई जैसे है वैसे रहेंगे |

लेकिन उन सब के बिच एक बार की बात है, मेरी एक सहेली थी प्रीति उसके पीछे एक सिरफिरा लड़का पड़ा हुआ था|

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